प्रेसबायोपिया के लिए लेसिक: कार्य और ध्यान रखने वाली बातें – LASIK For Presbyopia: Works And Things To Remember In Hindi

LASIK for Presbyopia: Is It Right for You?

प्रेसबायोपिया क्या है – What Is Presbyopia In Hindi

What Is Presbyopia?

प्रेसबायोपिया के लिए लेसिक सर्जरी को बहुत फायदेमंद माना जाता है। आमतौर पर बढ़ती उम्र के साथ आपकी दृष्टि स्वाभाविक रूप से बदल जाती है। प्रेसबायोपिया सबसे आम बदलावों में से एक है, जिसके कारण आपकी नज़दीकी वस्तुओं पर ध्यान केंद्रित करने की क्षमता कम हो जाती है। ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि आंखों के लेंस समय के साथ कम लचीले हो जाते हैं। इससे उनके लिए आकार बदलना और रोशनी को सही ढंग से फोकस करना ज्यादा कठिन हो जा सकता है। प्रेसबायोपिया आमतौर पर 40 साल की उम्र के आसपास शुरू होता है और 60 साल की उम्र तक लगभग सभी लोगों को प्रभावित करता है।

अगर आपको पास से देखने में कठिनाई होती है, तो आप प्रेसबायोपिया से पीड़ित हो सकते हैं। प्रेसबायोपिया वाले लोगों को किताबें और समाचार पत्र पढ़ने या साफ देखने में परेशानी होती है। इसके अलावा आपको छोटे प्रिंट को पढ़ने और फोन या कंप्यूटर स्क्रीन जैसी नज़दीकी वस्तुएं देखने में भी मुश्किल हो सकती है। यह समस्या पढ़ने, खाना बनाने और पास के काम करने जैसी रोज़मर्रा की गतिविधियों को ज्यादा कठिन बना सकती है। प्रेसबायोपिया आंख की एक सामान्य स्थिति है, जो लोगों को बड़े होने पर प्रभावित करती है। हालांकि, लेसिक से प्रेसबायोपिया का इलाज करना संभव है। इस ब्लॉग पोस्ट में हम प्रेसबायोपिया के लिए लेसिक के फायदों पर चर्चा करेंगे।

सर्जरी से प्रेसबायोपिया का उपचार – Treatment Of Presbyopia With Surgery In Hindi

Is There A Surgery To Fix Presbyopia?प्रेसबायोपिया को ठीक करने के लिए सर्जिकल विकल्प हैं। हालांकि, इन प्रक्रियाओं को आमतौर पर आखिरी उपाय माना जाता है, क्योंकि चश्मे या कॉन्टैक्ट लेंस जैसे अन्य तरीके विफल हो गए हैं। प्रेसबायोपिया के लिए सबसे आम प्रकार की सर्जरी को रिफ्रेक्टिव लेंस एक्सचेंज या आरएलई कहते हैं। इस प्रक्रिया में आंख के प्राकृतिक लेंस को हटाना और इसे आर्टिफिशियल लेंस से बदलना शामिल है। आरएलई निकट दृष्टि और दूरदर्शिता के साथ ही प्रेसबायोपिया दोनों को ठीक कर सकती है। यह सर्जरी पूरी तरह सुरक्षित मानी जाती है, लेकिन इसमें इंफेक्शन और खून बहने जैसे कुछ जोखिम शामिल हैं।

एक अन्य विकल्प को कंडक्टिव केराटोप्लास्टी यानी सीके के रूप में जाना जाता है। यह सर्जरी कॉर्निया के आकार को बदलने के लिए रेडियो तरंगों का उपयोग करती है, जो बदले में रोशनी के आंख में जाने का तरीका बदलती है। सीके दूरदर्शिता और प्रेसबायोपिया को ठीक कर सकती है, लेकिन इससे निकट दृष्टिदोष को ठीक करना संभव नहीं है। यह एक अपेक्षाकृत नई प्रक्रिया है और इसके दीर्घकालिक जोखिम अभी तक ज्ञात नहीं हैं। इसके अलावा किसी भी सर्जरी की तरह सीके में कुछ जोखिम भी शामिल हैं। ऐसे में कोई भी फैसला लेने से पहले अपने आंखों के डॉक्टर के साथ सभी जोखिमों और फायदों पर चर्चा करना सुनिश्चित करें।

लेसिक से प्रेसबायोपिया का उपचार – Treatment Of Presbyopia With Lasik In Hindi

प्रेसबायोपिया एक उम्र से संबंधित स्थिति है, जो आमतौर पर 40 साल से ज्यादा उम्र के लोगों को प्रभावित करती है। इस स्थिति में आपकी आंख का लेंस कम लचीला हो जाता है, जिससे आपको पास की वस्तुओं पर ध्यान केंद्रित करने में परेशानी होती है।

लेसिक कॉर्निया के आकार को सही करके दृष्टि में सुधार करने वाला एक मेडिकल प्रोसीजर है। हालांकि, आमतौर पर प्रेसबायोपिया उम्र के साथ होता है। इसका मतलब है कि लोग करीब से देखने की क्षमता खो देते हैं, क्योंकि उनकी आंखों में लेंस कम लचीला हो जाता है। लेसिक इस प्राकृतिक उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को होने से नहीं रोक सकती है।

अगर आप प्रेसबायोपिया को ठीक करने के लिए लेसिक पर विचार कर रहे हैं, तो एक अनुभवी नेत्र रोग विशेषज्ञ से परामर्श करना जरूरी है। वह आपकी व्यक्तिगत जरूरतों का आंकलन करके आपको उपचार के सबसे अच्छे विकल्प का सुझाव दे सकते हैं।

लेसिक प्रेसबायोपिया के लिए कैसे काम करती है?

How Does Lasik Surgery Works For Presbyopia?प्रेसबायोपिया के लिए लेसिक के काम इस प्रकार है:

  • सबसे पहले प्रक्रिया के दौरान सर्जन आंख में एक बहुत छोटा चीरा लगाते हैं। इसकी मदद से वह माइक्रोकेराटोम नाम का छोटा-सा उपकरण डालते हैं। माइक्रोकेराटोम उपकरण का उपयोग आंख की सतह पर ऊतक का पतला फ्लैप बनाने के लिए किया जाता है। एक बार फ्लैप बन जाने के बाद सर्जन गंभीर कॉर्निया को उजागर करते हुए इसे वापस मोड़ देते हैं।
  • अगले चरण में एक्सीमर लेजर का उपयोग शामिल है। इसकी मदद से कॉर्निया को दोबारा आकार दिया जाता है। इस प्रक्रिया के दौरान लेजर से कॉर्निया में ऊतक की छोटी मात्रा को हटाया जाता है, जिससे किसी भी तरह की अपवर्तक त्रुटियों को ठीक करने में मदद मिलती है। एक बार लेजर का उपयोग करने के बाद फ्लैप को वापस अपनी मूल स्थिति में रखा जाता है।
  • इस पूरी सर्जरी में आमतौर पर 30 मिनट से भी कम समय लगता है। साथ ही ज्यादातर लोग बाद में बहुत कम असुविधा की रिपोर्ट करते हैं। इस प्रकार ज्यादातर मामलों में लेसिक सर्जरी के नतीजे स्थायी होते हैं और आगे किसी उपचार की जरूरत नहीं होती है।

अगर आप प्रेसबायोपिया से पीड़ित हैं और इस बारे में ज्यादा जानना चाहते हैं कि क्या लेसिक सर्जरी आपकी मदद कर सकती है, तो कृपया आज ही किसी अनुभवी नेत्र रोग विशेषज्ञ से परामर्श करें।

प्रेसबायोपिया में किस लेसिक सर्जरी का उपयोग शामिल है?

निम्नलिखित लेसिक सर्जरी का उपयोग प्रेसबायोपिया के इलाज के लिए किया जाता है:

फोटोरिफ्रेक्टिव केराटेक्टॉमी या पीआरके

इस सर्जरी का उपयोग कॉर्निया के घुमाव को बदलने और दृष्टि में सुधार करने के लिए किया जाता है। साथ ही इसे निकट दृष्टि और दूरदर्शिता सहित दृष्टिवैषम्य दोनों के इलाज में उपयोग किया जा सकता है। पीआरके पारंपरिक लेसिक सर्जरी का एक सुरक्षित और प्रभावी विकल्प है, जिसमें रिकवरी का समय कम होता है। यह एक आउट पेशेंट प्रक्रिया है और इसे 30 मिनट से भी कम समय में किया जा सकता है।

मोनोविजन

यह एक अन्य प्रकार की लेसिक सर्जरी है, जिसका उपयोग सर्जन प्रेसबायोपिया के इलाज में  करते है। इस सर्जरी में दूर दृष्टि के लिए एक आंख और निकट दृष्टि के लिए दूसरी आंख को ठीक करना शामिल है। यह आपको दूर और पास दोनों वस्तुओं को साफ देखने में मदद करता है। मोनोविजन लेसिक में पारंपरिक लेसिक सर्जरी के मुकाबले कम रिकवरी का समय होता है। साथ ही इसे 30 मिनट से भी कम समय में किया जा सकता है।

इस सर्जरी में टांके लगाने की कोई जरूरत नहीं है और इंफेक्शन का खतरा बहुत कम है। सर्जरी के बाद पहले कुछ दिनों में आपको कुछ असुविधा और धुंधली दृष्टि का अनुभव होगा, लेकिन एक हफ्ते के अंदर आपकी दृष्टि में सुधार होने लगता है। नेत्र रोग विशेषज्ञओं के अनुसार, गंभीर दृष्टि समस्याओं या पिछली आंखों की सर्जरी वाले लोगों के लिए मोनोविजन लेसिक की सिफारिश नहीं की जाती है। ऐसे में लेसिक सर्जरी सिर्फ एक योग्य नेत्र रोग विशेषज्ञ द्वारा ही की जानी चाहिए।

अगर आपको प्रेसबायोपिया है और आप लेसिक सर्जरी पर विचार कर रहे हैं, तो अपने नेत्र रोग विशेषज्ञ से बात करें कि आपके लिए किस प्रकार की सर्जरी सही है। इस तरह पीआरके और मोनोविजन लेसिक प्रेसबायोपिया के इलाज और आपकी दृष्टि में सुधार करने के लिए सुरक्षित और प्रभावी दोनों तरीके हैं।

याद रखने वाली बातें – Things To Remember In Hindi

प्रेसबायोपिया लेसिक पर विचार करते समय आपको कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए, जैसे:

  • मरीज की उम्र: यह उपचार सिर्फ 40 साल और उससे ज्यादा उम्र वाले मरीजों के लिए अनुशंसित है।
  • मौजूदा अपवर्तक त्रुटि: मायोपिया, हाइपरोपिया या दृष्टिवैषम्य की एक गंभीर मात्रा इस उपचार के लिए उपयुक्त नहीं हो सकती है।
  • कॉर्निया की मोटाई: पतली कॉर्निया वाले मरीज इस उपचार के लिए उपयुक्त नहीं हो सकते हैं।
  • कॉर्निया का स्वास्थ्य: कुछ कॉर्नियल बीमारियों वाले मरीजों को इस उपचार के लिए उपयुक्त नहीं माना जाता है।

अगर आप प्रेसबायोपिया लेसिक पर विचार कर रहे हैं, तो यह पता लगाने के लिए कि क्या आप प्रक्रिया के लिए एक अच्छे उम्मीदवार हैं, एक अनुभवी नेत्र रोग विशेषज्ञ से परामर्श करना जरूरी है।

निष्कर्ष – Conclusion In Hindi

कुल मिलाकर प्रेसबायोपिया लेसिक उन लोगों के लिए एक प्रभावी उपचार है, जो प्रेसबायोपिया से पीड़ित हैं। इसे अपवर्तक सर्जरी का अन्य विकल्प भी माना जा सकता है। हालांकि, इस सर्जिकल प्रक्रिया की दीर्घकालिक प्रभावशीलता और सुरक्षा को निर्धारित करने के लिए ज्यादा रिसर्च करने की जरूरत है।

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