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ट्रांस पीआरके: प्रक्रिया, फायदे और सीमाएं – Trans PRK: Procedure, Benefits And Limitations In Hindi

Trans-PRK: All You Need to Know About This New Procedure

ट्रांस पीआरके क्या है – What Is Trans PRK In Hindi

What Is Trans-PRK?ट्रांस पीआरके (फोटोरिफ्रेक्टिव केराटेक्टॉमी) नई दृष्टि सुधार प्रक्रिया है, जिसे पारंपरिक पीआरके सर्जरी में सुधार के लिए विकसित किया गया है। ट्रांस पीआरके सर्जरी की प्रक्रिया पीआरके से मिलती-जुलती है। यह सर्जरी कॉर्निया के घुमाव को दोबारा बदलने के लिए लेजर का उपयोग करती है, लेकिन दोनों प्रक्रियाओं के बीच कई जरूरी अंतर हैं।

अगर आप आंखों की लेजर सर्जरी पर विचार कर रहे हैं, तो नई ट्रांस पीआरके प्रक्रिया आपके लिए बहुत फायदेमंद हो सकती है। यह एक अपेक्षाकृत नई तकनीक है, जो अपने कई फायदों के कारण तेजी से लोकप्रिय हो रही है। इस ब्लॉग पोस्ट में हम चर्चा करेंगे कि ट्रांस पीआरके क्या है। साथ ही आप जानेंगे कि यह सर्जरी कैसे काम करती है और प्रक्रिया के लिए कौन अच्छा उम्मीदवार है। इसके अलावा हम ट्रांस पीआरके से संबंधित आपके कुछ सामान्य सवालों के जवाब भी देंगे।

पीआरके बनाम ट्रांस पीआरके

आमतौर पर पीआरके और ट्रांस पीआरके दोनों प्रक्रियाएं दृष्टि सुधार के लिए उपयोग की जाती हैं। यह दोनों ही प्रक्रिया काफी हद तक मिलती-जुलती हैं, क्योंकि इनमें आंखों की सतह से ऊतक को हटाने के लिए लेजर का उपयोग शामिल है। दोनों के बीच का अंतर यह है कि पीआरके के साथ सर्जन प्रक्रिया करने से पहले कॉर्निया यानी एपिथेलियम की बाहरी परत को हटा देते हैं। जबकि, ट्रांस पीआरके में प्रक्रिया पूरी होने के बाद एपिथेलियम को हटा दिया जाता है।

पीआरके सर्जरी के ऐसे ही कुछ फायदे निम्नलिखित हैं-

  • इस प्रक्रिया के बाद दर्द होने की संभावना कम होती है।
  • ट्रांस पीआरके के साथ रिकवरी का समय कम है।
  • पीआरके की तुलना में सर्जन पतले कॉर्निया वाले मरीजों पर ट्रांस पीआरके कर सकते हैं।

अगर आप दृष्टि सुधार सर्जरी पर विचार कर रहे हैं, तो अपने सर्जन से पूछना सुनिश्चित करें कि क्या यह सर्जरी आपके लिए एक विकल्प है।

ट्रांस पीआरके के जोखिम

यह अभी भी एक अपेक्षाकृत नई सर्जिकल प्रक्रिया है और किसी भी सर्जरी की तरह इसमें कुछ जोखिम शामिल हैं। हालांकि, यह जोखिम आमतौर पर बहुत कम होते हैं और एक अनुभवी सर्जन द्वारा प्रभावी रूप से प्रबंधित किए जा सकते हैं।

  • इस सर्जरी की सबसे आम जटिलता कॉर्नियल धुंध है, जो धुंधली दृष्टि का कारण बन सकती है। यह आमतौर पर कुछ महीनों के अंदर अपने आप ठीक हो जाता है, लेकिन कॉर्टिकोस्टेरॉइड आई ड्रॉप्स के साथ इसका इलाज संभव है।
  • एक अन्य संभावित जटिलता इंफेक्शन है, जो किसी भी प्रकार की सर्जरी से हो सकती है। हालांकि, नई तकनीक और एंटीबायोटिक दवाओं के उपयोग के बाद इंफेक्शन का जोखिम बहुत कम होता है।
  • सर्जरी के बाद सूखी आंख का अनुभव करना भी संभव है। हालांकि, यह आमतौर पर अस्थायी होता है और इसे बनावटी आंसू या अन्य उपचारों की मदद से प्रबंधित किया जा सकता है। जबकि, दुर्लभ मामलों में कॉर्नियल अल्सर जैसी ज्यादा गंभीर जटिलताएं शामिल हो सकती हैं। इन्हें अक्सर दवाओं या किसी अन्य सर्जरी की मदद से ठीक किया जा सकता है।

कुल मिलाकर यह सर्जरी जटिलताओं के कम जोखिम के साथ एक सुरक्षित और प्रभावी सर्जिकल प्रक्रिया मानी जाती है। हालांकि, किसी भी सर्जरी की तरह फैसला लेने से पहले अपने सर्जन के साथ जोखिमों और फायदों पर चर्चा करना जरूरी है।

ट्रांस पीआरके के लिए सही उम्मीदवार

कुछ लोगों को ट्रांस पीआरके सर्जरी के लिए सबसे अच्छा उम्मीदवार माना जाता है। इनमें निम्नलिखित स्थितियों वाले शामिल हैं:

  • मायोपिया का हल्के से मध्यम स्तर है।
  • स्वस्थ कॉर्निया है।
  • बड़ी पुतलियां नहीं हैं।
  • पिछली अपवर्तक सर्जरी नहीं हुई है।
  • गर्भवती या स्तनपान कराने वाली महिला नहीं हैं।
  • किसी अन्य आंख की स्थिति से पीड़ित नहीं हैं।

ट्रांस पीआरके की प्रक्रिया – Procedure Of Trans PRK In Hindi

What Is The Procedure For Trans-PRK?इस सर्जरी की प्रक्रिया निम्नलिखित है:

  • सबसे पहले एनेस्थेटिक आई ड्रॉप्स से आपकी कॉर्निया को सुन्न कर दिया जाता है।
  • इसके बाद कॉर्निया की सतह परत को माइक्रोकेराटोम या फेम्टोसेकेंड लेजर उपकरण का उपयोग करके धीरे से हटा दिया जाता है। यह ऊतक का एक बहुत पतला फ्लैप बनाता है, जिसे ऊपर उठाया जाता है और फिर सर्जन कॉर्निया (स्ट्रोमा) की बीच वाली परत को सामने लाते हैं।
  • अगला कदम एक्साइमर लेजर को स्ट्रोमा की सतह पर लागू करना है। लेजर कॉर्निया से छोटी मात्रा में ऊतक को ठीक से हटाने के लिए एक शांत पराबैंगनी प्रकाश किरण का उपयोग करता है। इससे कॉर्निया का आकार बदल जाता है और आपको दृष्टि से संबंधित समस्याओं को ठीक करने में मदद मिलती है।
  • लेजर उपचार पूरा होने के बाद ऊतक के फ्लैप को उसके मूल स्थान पर बदल दिया जाता है। एपिथेलियम कोशिकाएं अगले कुछ दिनों में वापस बढ़ने लगती हैं और आंख अपने आप ठीक हो जाती है।

यह फोटोरिफ्रेक्टिव कोरटक्टॉमी यानी पीआरके का एक नया संस्करण है। पीआरके में लेजर उपचार से पहले कॉर्निया की पूरी सतह परत हटा दी जाती है। जबकि, ट्रांस पीआरके के साथ सर्जन ऊतक की सिर्फ एक बहुत पतली परत हटाते हैं। इससे उपचार प्रक्रिया को तेज करने में मदद करती है। ट्रांस पीआरके की कीमत सर्जन और प्रक्रिया के स्थान के आधार पर अलग-अलग होती है। आमतौर पर ट्रांस पीआरके सर्जरी की कीमत 35000 से लेकर 40,000 रुपये है, जिसमें जांच या बाद में देखभाल की कीमत शामिल नहीं है।

ट्रांस पीआरके के फायदे – Benefits Of Trans PRK In Hindi

इसके कई फायदे हैं, जिनमें शामिल हैं:

उपचार का कम समय

इसका मतलब है कि प्रक्रिया के बाद बैंडेज कॉन्टैक्ट लेंस की कोई जरूरत नहीं है। इससे रिकवरी में लगने वाला समय कम हो जाता है। लेजर उपचार ट्रांस पीआरके से पहले एपिथेलियम यानी कॉर्निया की सबसे बाहरी परत को हटा दिया जाता है।

दर्द कम का अनुभव

इसमें एपिथेलियम को हटाने की कोई जरूरत नहीं है, जिससे मरीजों को आमतौर पर कम दर्द का अनुभव होता है।

बेहतर सुरक्षा

इस सर्जरी में जटिलताओं का जोखिम कम होता है, क्योंकि एपिथेलियम को हटाने के लिए ब्लेड का उपयोग करने की कोई जरूरत नहीं होती है।

बेहतर दृष्टि

कुछ अध्ययनों से पता चला है कि इससे कॉर्निया में धुंधलेपन को कम किया जा सकता है। इन जोखिमों में कमी के कारण पीआरके से आपको पारंपरिक पीआरके की तुलना में बेहतर दृष्टि हासिल हो सकती है।

ट्रांस पीआरके की सीमाएं – Limitations Of Trans PRK In Hindi

इस सर्जिकल प्रक्रिया की अलग-अलग सीमाएं हैं:

  • यह सर्जरी बहुत बड़ी पुतली वाले मरीजों के लिए अनुशंसित नहीं है। ऐसा इसलिए है, क्योंकि इससे चकाचौंध और चमकते घेरे जैसी जटिलताओं का खतरा बढ़ सकता है।
  • यह उन मरीजों के लिए उपयुक्त नहीं है, जिनकी लेसिक जैसी पिछली अपवर्तक सर्जरी हुई है।
  • यह सर्जरी कुछ प्रकार की अपवर्तक त्रुटियों के उपचार में प्रभावी नहीं हो सकती है। उदाहरण के लिए, दृष्टिवैषम्य के उच्च स्तर।

यह ट्रांस पीआरके की सीमाओं में शामिल हैं और इस प्रक्रिया से पहले समय हमेशा इन सीमाओं पर विचार करना जरूरी है।

निष्कर्ष – Conclusion In Hindi

ट्रांस पीआरके सर्जरी अपवर्तक त्रुटियों के इलाज का एक नया और प्रभावी तरीका है। यह प्रक्रिया पारंपरिक पीआरके से बेहतर साबित हुई है, जिसमें मरीज कम दर्द और जल्दी रिकवरी की रिपोर्ट करते हैं। यह सर्जिकल प्रक्रिया उन लोगों के लिए सबसे अच्छा विकल्प हो सकती है, जो लेसिक सर्जरी के विकल्प की तलाश कर रहे हैं।

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